Sunday, 10 June 2012

तू ...






नींद के किस ख्वाब से मिला है तू ,
ख्वाब के किस छोर से सिला है  तू ...
Boy, I did not see you coming ,
कब,कैसे और कहाँ मिला है तू ...


याद के किस पल से जुड़ा है तू ,
पल के किस क्षण से रमां  है तू ...
मुझसे जुदा होकर भी , I don't know , 
जाने क्यों मुझसे जुड़ा है तू ...


अनदेखा सा कोई हमसफ़र ,
मुस्कुराहटो का एक नया सेहर ...
Who are you? Who are you?
अंजानी है मेरी नज़रे , अंजाना है तेरा शहर ...

2 comments:

  1. :) Good one.. the English lines in between were a pleasant surprise!

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