Monday, 23 April 2012

जो बात नहीं कही .... ( Some things unsaid...)





ना तूने कभी याद किया .
ना मैंने कभी फ़रियाद करी...
यूं ही गुज़रते लम्हों से बस.
कभी कभी तेरी बात करी ...


एक पल ख़ामोशी का.
खामोश सी बैठी थी दीवानगी ...
एक आंसू कोई आँखों का .
जिसमे दम घोट, सिसक सी रही दीवानगी ...


ना पाने का गम समझ आता है.
ना जान ने की तड़प समझ आती हैं...
पर  पाकर भी ना पाना है एक ऐसा तूफ़ान.
जिसकी झुलस खाने पे ही समझ आती हैं ...


तू नहीं तो तेरी याद ही सही.
दिल  नहीं तो ये प्यास ही सही...
पानी तो भरा सागार में भी होता हैं.
पर पी ना सकू तो ये आग ही सही ...



P/S- Got tired of reading my 'attempt' at english translation....  This is the original, I am keeping it this way alone. Not adding a translation! Sorry... :)


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